वर्ल्ड बैडमिंटनः मैच हारने के बाद बोली सिंधु, नोजोमी को हराना आसान नहीं

रियो ओलंपिक 2016 में गोल्ड मेडल जीतने की भारत की उम्मीदें टूटने के बाद एक बार दोबारा भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में इतिहास...

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रियो ओलंपिक 2016 में गोल्ड मेडल जीतने की भारत की उम्मीदें टूटने के बाद एक बार दोबारा भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप में इतिहास रचने से चूक गईं. इस हार के बाद वह काफी भावुक हो गईं. यही नहीं उनकी आंखों से आंसू झलक पड़ें. हालांकि आपको बता दें पीवी सिंधु ने इस मैच को जीतने के लिए अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी थी. हालांकि कुछ किस्मत और कुछ विपक्षी ख‍िलाड़ी की प्रतिभा की वजह से उनका वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप के 40 साल के इतिहास में भारत की ओर से गोल्ड मेडल जीतने का सपना अधूरा रह गया. उन्हें सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा. सिंधु को जापान की नोजोमी ओकुहारा ने 21-19,20-22,22-20 से हराया।

वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिंधु का यह तीसरा मेडल है. उन्होंने 2013 और 2014 में ब्रॉन्ज मेडल जीते थे. ग्लास्गो (स्कॉटलैंड) में 22 साल की सिंधु ने वर्ल्ड नंबर- 10 चीन की 19 साल की चेन यू फेई को 21-13, 21-10 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी.

बैडमिंटन स्टार सिंधू निर्णायक गेम में 20-20 के अंक पर अहम गलती का जिक्र करते हुए कहा, ”मैं दुखी हूं। तीसरे गेम में 20-20 अंक पर यह मैच किसी का भी हो सकता था। दोनों लोगों का लक्ष्य स्वर्ण पदक था और मैं इसके बहुत करीब थी, लेकिन आखिरी लम्हों में सब कुछ बदल गया। उन्होंने कहा, ‘उन्हें हराना आसान नहीं है। जब भी हम खेले तो वह आसान मुकाबला नहीं रहा, वह बहुत-बहुत मुश्किल था। मैंने कभी उन्हें हल्के में नहीं लिया। हमने कभी कोई शटल नहीं छोड़ी। मैं मैच को लंबे समय तक चलाने के लिए तैयार थी लेकिन मुझे लगता है कि यह मेरा दिन नहीं था।

वहीं इतने कड़े मुकाबले को हारने का दर्द सिंधु नहीं झेल पाईं और अंतिम पॉइंट और मैच हारते ही वह वहीं कोर्ट में लेट गईं. उठने पर अपने कोच गोपीचंद तक जाते हुए उनकी आंखें नम हो गई थीं. मीडिया के कैमरों में साफ दिख रहा था कि उनकी आंखों में आंसू थे. उसके बाद सिंधु ने तौलिए से चेहरा पोछ लिया.

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