अयोध्या विवाद: सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या पर हुई गर्मागरम बहस, पूजा का हक मालिकाना तय होने के बाद

शुक्रवार को अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहे कोर्ट का नजारा अलग था। रामलला विराजमान और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जल्दी सुनवाई की मांग हो रही...

54 0
54 0

शुक्रवार को अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहे कोर्ट का नजारा अलग था। रामलला विराजमान और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जल्दी सुनवाई की मांग हो रही थी। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, मुहम्मद हाशिम और निर्मोही अखाड़ा मामला तैयार नहीं होने के आधार पर जल्द सुनवाई का विरोध कर रहे थे। खचाखच भरी अदालत में विशेष पीठ को अपनी दलीलों से सहमत करने के लिए वकीलों की आवाज तेज होने लगी। इस पर जस्टिस अशोक भूषण को अदालत का नजरिया समझाने के लिए सामने लगी माइक का सहारा लेना पड़ गया।

सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा इस विवाद से जुड़े सभी कागजात संस्कृत, पारसी, उर्दू, अरबी और दूसरी भाषाओं में हैं. इन्हें अंग्रेजी में अनुवादित करने के बाद 5 दिसंबर से कोर्ट में पुन: सुनवाई होगी. इसके अगले दिन 6 दिसंबर को बाबरी ढांचा ढहाने की बरसी भी है. कोर्ट ने शिया वक्फ बोर्ड द्वारा वर्ष 1946 में निचली अदालत द्वारा दिए फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. इसमें शिया बोर्ड ने मंदिर तोड़कर मस्जिद का निर्माण होने की बात कही है. इस पर आपत्ति जताते हुए सुन्नी वक्फ बोर्ड ने कहा कि 72 साल बाद अपील का कोई मतलब नहीं है.  जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि अयोध्या भूमि विवाद निपटाने के बाद अन्य याचिकाओं पर विचार किया जाएगा.

वैद्यनाथन ने निर्मोही अखाड़े की अपील का विरोध करते हुए कहा कि ये तो पुजारी हैं। इनका जमीन पर मालिकाना हक से क्या लेना-देना? लेकिन, अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि वे उनसे पहले से इस मामले का मुकदमा लड़ रहे हैं।

In this article