33 साल बाद सेना प्रमुख की नियुक्ति में वरिष्ठता का नहीं रखा गया ख्‍याल, उठे सवाल

आर्मी चीफ की नियुक्ति के मामले में सरकार ने 33 साल बाद वरिष्ठता को नजरअंदाज किया है। आर्मी में सबसे सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी पर सरकार ने...

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आर्मी चीफ की नियुक्ति के मामले में सरकार ने 33 साल बाद वरिष्ठता को नजरअंदाज किया है। आर्मी में सबसे सीनियर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी पर सरकार ने लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को तरजीह दी है। आम तौर पर सेनाओं के प्रमुखों की नियुक्ति की घोषणा दो से तीन महीने पहले होती थी, लेकिन पहली बार यह काम महज 14 दिन पहले किया गया है।

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने मामले को लेकर अपने ट्विटर वॉल के माध्‍यम से पूछा है कि आर्मी चीफ की नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया? क्यों लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अली हरीज की जगह बिपिन रावत को प्राथमिकता दी गई. पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह के बाद सबसे वरिष्ठ है जबकि दक्षिणी सेना कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरीज अगले सबसे वरिष्ठ हैं.

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