गुजरात में राहुल का चाणक्य है अशोक गहलोत, BJP की नाक में कर रखा है दम

बीजेपी ने जिस गुजरात को हिंदुत्व की प्रयोगशाला के तौर पर स्थापित किया और विकास का तड़का लगाकर पांच बार चुनावों में जीत हासिल कर सत्ता पर विराजमान...

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बीजेपी ने जिस गुजरात को हिंदुत्व की प्रयोगशाला के तौर पर स्थापित किया और विकास का तड़का लगाकर पांच बार चुनावों में जीत हासिल कर सत्ता पर विराजमान होती रही, आज उसी गुजरात की सियासी रणभूमि में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी उसे टक्कर दे रहे हैं. इस जंग में जातीय समीकरण और सॉफ्ट हिंदुत्व राहुल के हथियार बने हुए हैं.

राहुल के इस सक्रियता से गुजरात में दो दशकों से वेंटिलेटर पर पड़ी कांग्रेस में नई जान फुंकती नजर आ रही है. कांग्रेस कार्यकर्ता उत्साह और जोश से लबरेज हैं. हालांकि राहुल को इस सियासी जंग में जिन पैंतरों के चलते बढ़त मिलती दिख रही है, उनके पीछे कांग्रेस के गुजरात प्रभारी और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का दिमाग बताया जा रहा है. आज कम से कम कांग्रेसियों के लिए तो गुजरात में गहलोत चाणक्य की भूमिका में हैं.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने देवपूजा को भी अपना एक हथियार बनाया, वहीं भाजपा ने भी राहुल गांधी के जहर बुझे तीरों की काट के लिए काउंटर प्लान बनाया है। हालांकि इस सब के बीच अगर बात कांग्रेस की करें तो कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने के लिए अपने तरकश में कुछ ऐसे ‘तीर’ रखे हैं, जिससे भाजपा चोटिल हो रही है। पिछले कुछ समय में इन तीरों ने भाजपा को घेरने के साथ अपनी रणनीति में बदलाव करने को भी मजबूर किया है। अगर ये कहा जाए कि राहुल गांधी गुजरात विधानसभा को अपने पार्टी अध्यक्ष पद के लॉचिंग पैड के रूप में देख रहे हैं तो गलत नहीं होगा।

दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार की एक बड़ी वजह एंटनी कमेटी ने हिंदू विरोधी छवि मानी थी. राहुल ने गुजरात यात्रा के जरिए कांग्रेस की हिंदू विरोधी छवि को तोड़ने की कवायद की है. राहुल गांधी ने नवसजृन यात्रा की शुरूआत सौराष्ट्र के द्वारकाधीश मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ की. राहुल गुजरात में अपनी यात्रा के दौरान माथे पर तिलक लगाए और रास्ते में पड़ने वाली मंदिरों के दर्शन और माथा टेकते हुए दिखते हैं, जिससे बीजेपी बेचैन है.

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