मोदी बोले: जयप्रकाश नारायण की जान नानाजी देशमुख ने बचाई थी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को जनसंघ के बडे नेता नानाजी देशमुख की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम दिल्ली के पूसा में इंडियन एग्रिकल्चर...

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watch प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को जनसंघ के बडे नेता नानाजी देशमुख की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम दिल्ली के पूसा में इंडियन एग्रिकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी देशभर से आए 10 हजार ग्रामीणों से मुलाकात की। साथ ही उन्होंने कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित भी किया। कार्यक्रम में संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि शहर को गांवों के लिए मार्केट बनना चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि गांवों को शहर के बराबर खडा करना होगा, देश में जातिवाद का जहर खत्म करना होगा। साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर करना जरुरी है। जिन राज्यों में ज्यादा गरीबी है वहां पर मनरेगा का काम कम है, लेकिन जहां पर गुड गवर्नेंस है वहां पर मनरेगा का काम ज्यादा है।

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go here पीएम ने कहा, ‘जब भ्रष्टाचार के खिलाफ जयप्रकाश जी जंग लड़ रहे थे तो दिल्ली की सल्तनत में खलबली मच गयी। उन्हें रोकने के लिए षड्यंत्र होते थे। पटना के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जेपी पर हमला हुआ। उनके बगल में नानाजी देशमुख खड़े थे। नानाजी ने अपने हाथों पर मृत्युदंड के रूप में आए प्रहार को झेल लिया। हाथ की हड्डियां टूट गई। वो ऐसी घटना थी कि देश का ध्यान नानाजी देशमुख की तरफ गया।’

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http://jesspetrie.com/?amilto=%D9%84%D9%84%D8%AA%D8%AC%D8%A7%D8%B1%D8%A9-%D8%A7%D9%84%D8%B0%D9%87%D8%A8 पीएम मोदी ने लोगों से अपील की दीवाली पर दिये गांव के कुम्हार से ही खरीदें। उन्होंने कहा कि 18000 गांव ऐसे थे जहां पर बिजली नहीं थी। मोदी ने कहा कि हमने 1000 दिन में इन गांवों में बिजली देने का बीडा उठाया और अब तक 15,000 गांवों में बिजली पहुंचा चुके हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का लक्ष्य है किसान की लागत कम करना और मुनाफा बढाना।

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source site प्रधानमंत्री ने कहा, ‘इन दोनों महापुरुषों ने अपने जीवनकाल में देश के संकल्प के लिए स्वयं को सौंप दिया। इन दोनों के जीवन का पल-पल मातृभूमि के लिए, देशवासियों के कल्याण के लिए था और आजीवन इसमें जुटे रहे। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन तीव्रता पर पहुंचा ऐसे समय में जयप्रकाश जी लोहिया जी जैसे युवाओं ने आगे आकर आंदोलन की डोर संभाली। उस कालखंड में वे लोग प्रेरणा का स्त्रोत बन गए।’

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