दोस्ती की चाहत पर हमारे हथियार खिलौना नहीं: डोकलाम की तनातनी पर चीन

डोकलाम को लेकर भारत से जारी तनाव के बीच चीन ने कहा कि हमारे बड़े हथियार सिर्फ खिलौने नहीं हैं. चीन ने हालांकि इसके साथ ही कहा कि...

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डोकलाम को लेकर भारत से जारी तनाव के बीच चीन ने कहा कि हमारे बड़े हथियार सिर्फ खिलौने नहीं हैं. चीन ने हालांकि इसके साथ ही कहा कि उसकी नौसेना हिंद महासागर की सुरक्षा बरकरार रखने के लिए भारतीय नेवी से हाथ मिलाना चाहती है.

बता दें कि चीनी नौसेना ने शुक्रवार को भारतीय मीडिया को अपना युद्धपोत यूलिन दिखाया और साथ ही वहां तैनात हथियारों की जानकारी दी. चीन ने तटीय शहर झानजियांग में अपने सामरिक दक्षिण सागर बेड़े (एसएसएफ) के अड्डे को पहली बार भारतीय पत्रकारों के एक समूह के लिए खोला है. इसके साथ ही पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के अधिकारियों ने कहा कि हिंद महासागर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक साझा स्थान है.

चीन के एसएसएफ के डिप्टी चीफ ऑफ जनरल ऑफिस कैप्टन लियांग तियानजुन ने कहा, ‘‘मेरी राय में चीन और भारत हिंद महासागर की सुरक्षा में संयुक्त योगदान दे सकते हैं।’’  उनकी यह टिप्पणी तब आई है जब चीनी नौसेना ने अपनी वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर विस्तार की योजना शुरू की है। लियांग ने हिंद महासागर में चीन के युद्धपोतों और पनडुब्बियों की बढ़ती गतिविधियों पर भी स्पष्टीकरण दिया। चीन ने हिंद महासागर में होर्न ऑफ अफ्रीका के जिबूती में पहली बार नौसैन्य अड्डा स्थापित किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हिंद महासागर विशाल महासागर है. क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के प्रति योगदान के लिए यह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए साझा स्थान है.’’ हिंद महासागर में चीन की सबमरीन्स की मौजूदगी के बारे में उन्होंने कहा- हम एंटी पायरेसी के लिए लॉजिस्टिक सपोर्ट देना चाहते हैं. इसके अलावा यूएन के पीस कीपिंग और रिलीफ मिशन में मदद करना चाहते हैं. ये भी कोशिश है कि हिंद महासागर में तैनात चीन के सैनिकों को यहां आराम भी मिले . इसलिए, दिबूती नेवल बेस बनाया गया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि चीन कभी ‘‘दूसरों देशों में घुसपैठ नहीं करेगा’’, लेकिन ‘‘दूसरे देशों से बाधित भी नहीं होगा.’’

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