एक हादसे ने दिलाई असद को कुर्सी, सितारा चमकाने के लिए पूरी दुनिया को लड़ा दिया

<सितारा चमकाने के लिए पूरी दुनिया सीरिया सुलग रहा है. इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं. नस्लें तबाह हो गई हैं. लाखों बेकसूर बेघर हो गए हैं. मासूम बच्चे,...

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एक हादसे ने दिलाई असद को कुर्सी

<सितारा चमकाने के लिए पूरी दुनिया
सीरिया सुलग रहा है. इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं. नस्लें तबाह हो गई हैं. लाखों बेकसूर बेघर हो गए हैं. मासूम बच्चे, महिलाएं, बुजर्ग तड़प रहे हैं. रोटी को तरस रहे हैं. लेकिन सत्ता पर काबिज शख्स का दिल अपने मुल्क के लोगों की बर्बादी का खौफनाक मंजर देखकर भी नहीं पसीज रहा है. उसने अपनी हुकूमत बचाने के लिए पूरी दुनिया को जंग के लिए मजबूर कर दिया है. जिसके बाद अब 24 साल पुराने उस हादसे को भी याद किया जा रहा है, जिसने बशर अल असद को सीरिया की सत्ता के शिखर तक पहुंचा दिया.

1994 में हुई बशर के बड़े भाई की मौत
बशर-अल असद को सीरिया की सत्ता विरासत में मिली है. असद उस परिवार से आते हैं, जो दशकों तक इस देश पर राज कर चुका है. असद के वालिद हाफिज अल असद ने 1971 से सन् 2000 तक इस मुल्क पर अधिकार किया. हाफिज अल असद के बाद इस राजनीतिक विरासत का जिम्मा उनके बड़े बेटे बासिल अल असद को मिलना था. लेकिन सन् 1994 में उनकी एक सड़क हादसे में मौत हो गई. यही हादसा बशर अल असद के राजनीति में आने का सबब बना.

भाई की मौत के बाद मिली जिम्मेदारी
हाफिज अल-असद के 6 बच्चों में बशर अल-असद तीसरे नंबर पर पैदा हुए. परिवार में सबसे बड़ी उनकी बहन हैं, जबकि बशर से बड़े भाई बासिल अल-असद की सड़क हादसे में मौत हो चुकी है.
हफीज अल-असद के बड़े बेटे बासिल को उनका राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता था. वह राष्ट्रपति की सुरक्षा के चीफ थे और सैन्य वर्दी में दिखाई पड़ते थे. साल 1994 में एक कार हादसे में बासिल की मौत हो गई और सारी सियासी जिम्मेदारियां बासिल के छोटे भाई बशर अल-असद के कंधों पर आ गई.

बशर अल-असद का जीवन
बशर अल-असद सीरिया से ही ग्रेजुएट हुए हैं. उन्होंने दमिश्क यूनिवर्सिटी से 1988 में मेडिकल की पढ़ाई की थी. उच्च शिक्षा के लिए वह लंदन चले गए थे. जब बासिल की मौत हुई, उस वक्त बशर लंदन में ही थे. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राजनीति में बशर को कोई खास दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन बासिल की मौत के बाद उनके पिता ने उन्हें वापस दमिश्क बुला लिया.

पिता की मौत के बाद 2000 में बने राष्ट्रपति
बशर अल-असद के सीरिया लौटने पर उन्हें पहले 1994 में ही टैंक बटालियन कमांडर बनाया गया. इसके बाद 1997 में वो लेफ्टिनेंट कर्नल बने और 1999 में उन्हें कर्नल बना दिया गया. साल 2000 में बशर के पिता हाफिज अल-असद की मौत हो गई, जिसके बाद पारिवारिक सत्ता को संभालने की जिम्मेदारी बशर ने उठाई और सन् 2000 में ही बशर अल-असद सीरिया के राष्ट्रपति बन गए. आज 18 साल बाद भी बशर सत्ता के शिखर पर काबिज हैं.
अल्पसंख्यक शिया समुदाय से आते हैं बशर
2011 की अरब क्रांति भी उनकी कुर्सी नहीं हिला सकी है. ये उनकी ताकत का ही नतीजा है कि 74 फीसदी सुन्नी मुसलमान आबादी वाले सीरिया में 10 फीसदी से कम आबादी वाले शिया समुदाय के बशर अल-असद निरंतर राज कर रहे हैं. चार दशकों से चली आ रही इस सत्ता को बचाने के लिए उन्होंने सीरिया को युद्ध का अखाड़ा बना दिया है. जहां दुनिया के दो ताकतवर गुट आपस में जोर-आजमाइश कर रहे हैं और सीरिया की धरती पर पैदा हुए बेकसूरों को कब्र तक नसीब नहीं हो रही है.

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