सातवें वेतनमान का लाभ न मिलने से भड़के 60 हजार कर्मी

सातवें वेतनमान का लाभ न मिलने से निगम, निकाय, जल संस्थान व प्राधिकरण के करीब 60 हजार कर्मचारी खफा हैं। उत्तराखंड निगमों, निकाय, जल संस्थान, प्राधिकरण कर्मचारी संयुक्त...

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सातवें वेतनमान का लाभ न मिलने से निगम, निकाय, जल संस्थान व प्राधिकरण के करीब 60 हजार कर्मचारी खफा हैं। उत्तराखंड निगमों, निकाय, जल संस्थान, प्राधिकरण कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा की बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि जल्द उन्हें राज्य कर्मचारियों की भांति सातवें वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया तो प्रदेश के 60 हजार कर्मचारी आंदोलन की राह पर चल पड़ेंगे।

सोमवार को परेड ग्राउंड स्थित संघ भवन में सभी निगमों के पदाधिकारियों की बैठक हुई। इस दौरान राज्य निगम कर्मचारी महासंघ के महामंत्री रवि पचौरी ने कहा कि सरकार ने सभी राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग का लाभ दे दिया है। जबकि, निगम कर्मियों को यह कहते हुए अधर में लटका दिया कि पहले सभी निगमों या अन्य एजेंसियों के बोर्ड प्रस्ताव पास कर वित्त सचिव को भेजेंगे। इसके बाद सचिव वित्त तय करेंगे कि संबंधित निगम या निकाय को सातवें वेतनमान का लाभ दिया जाए या नहीं। महासंघ के अध्यक्ष संतोष रावत ने कहा कि सरकार का यह फैसला निगम कर्मचारियों के खिलाफ है। यही कारण है कि सातवें वेतनमान का लाभ लेने के लिए सभी निगमों ने मिलकर संयुक्त मोर्चा का गठन किया है। यदि सरकार उनकी मांग नहीं मानी तो 20 से 22 दिसंबर तक सभी निगम कार्यालयों पर कर्मचारी गेट मीटिंग करेंगे। 23 दिसंबर को परेड ग्राउंड में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा और 26 दिसंबर को सभी कार्यालयों पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन होगा। इस दौरान विभिन्न कर्मचारी संगठनों से गजेंद्र कपिल, रमेश बिंजोला, एके चतुर्वेदी, रामकुमार, प्रवीन सिंह रावत, बीपी बहुगुणा, सूर्यप्रकाश रणकोटी, टीएस पंवार, नाम बहादुर क्षेत्री, गुरमीत सिंह, एसपी पंत, ललित शर्मा, बालम सिंह नेगी, वाईएस राणा, हरि सिंह, आशीष उनियाल, सुनील पुंडीर आदि पदाधिकारी मौजूद रहे।

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