भ्रष्टों को घेरने के लिए बार-बार बदले नियम: पीएम मोदी

नोटबंदी के बाद सरकार द्वारा बार-बार बदले गए नियमों पर विपक्ष हर बार केंद्र को निशाना बनाता रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार द्वारा बार...

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नोटबंदी के बाद सरकार द्वारा बार-बार बदले गए नियमों पर विपक्ष हर बार केंद्र को निशाना बनाता रहा है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सरकार द्वारा बार बार संशोधनों और यू-टर्न को उचित ठहराया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस नीति के कार्यान्वयन में लगातार परिवर्तन जानबूझ किए गए ताकि जो लोग इस फैसले के उद्देश्य को परास्त करने की कोशिश कर रहे थे उन्हें घेर कर उनकी कोशिश को नाकाम किया जा सके।

‘तू डाल-जाल मैं पात-पात’

इंडिया टुडे को दिए साक्षात्कार में पीएम मोदी ने कहा, ‘हमें नीति और रणनीति में फर्क करना आना चाहिए। नोटबंदी हमारी नीति है और उसके रोज-रोज बदलते नियम हमारी रणनीति, जिससे हम दुश्मनों से आगे रह सकें।इसे ‘तू डाल-जाल मैं पात-पात’ कहा जा सकता है। उन्होंने आगे कहा, ‘500 और 1000 के नोट को बैन करने का फैसला किसी तात्कालिक फायदे के लिए नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था में दीर्घकालिक सकारात्मक बदलाव के लिए किया गया है।’

‘मेरा कोई निजी फायदा नहीं ‘

पीएम ने आगे कहा कि अगर आपकी सोच स्पष्ट हो और नीयत पाक-साफ तो नतीजा हर किसी के सामने होगा। मेरे आलोचक मेरे खिलाफ चाहे जो कह लें, सच्चाई ये है कि इस सब से मेरा कोई निजी फायदा नहीं है। ये निर्णय इतना बड़ा है कि हमारे बड़े से बड़े अर्थशास्त्री भी इस पर असमंजस में पड़ गए हैं। लेकिन भारत की सवा अरब की जनता ने तकलीफ झेलते हुए भी सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

कांग्रेस पार्टी पर साधा निशाना

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पीएम मोदी ने कहा, ‘मुझे हमारे विरोधियों खासकर कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व पर तरस आता है। एक तरफ वो कहते हैं कि मैंने ये फैसला राजनीतिक फायदे के लिए लिया है, दूसरी तरफ वो कहते हैं कि इससे लोगों को काफी तकलीफ उठानी पड़ी है। लेकिन ये दोनों एक साथ कैसे चल सकता है?’

मनमोहन सिंह पर किया पलटवार

पीएम मोदी ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह का जिक्र करते हुए कहा, ‘ये दिलचस्प है कि मॉन्यूमेंटर मिस मैनेजमेंट जैसे शब्द मनमोहन सिंह जैसे नेता की जुबान से निकले हैं, जो इस देश के 45 साल के आर्थिक सफर में शामिल रहे हैं। वह डीईए सचिव के मुख्य आर्थिक सलाहकार से लेकर भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर, योजना आयोग के उपाध्यक्ष, देश के वित्त मंत्री और प्रधानमंत्री तक रहे हैं, मगर उनके दौर में समाज का एक बड़ा तबका गरीबी में जीता रहा है।’

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