पाकिस्‍तान आर्मी चीफ ने आते ही बदला आईएसआई चीफ

पाकिस्‍तान सेना के नए प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने रविवार (11 दिसंबर) को देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया को बदल दिया। इसके साथ ही सेना...

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पाकिस्‍तान सेना के नए प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने रविवार (11 दिसंबर) को देश की खुफिया एजेंसी आईएसआई के मुखिया को बदल दिया। इसके साथ ही सेना के कई आला अधिकारियों को इधर-उधर किया गया है। बाजवा ने लेफ्टिनेंट जनरल रिजवान अख्‍तर की जगह नावेद मुख्‍तार को आईएसआई का नया प्रमुख बनाया है। अख्‍तर को नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी को प्रेसीडेंट नियुक्‍त किया गया है। पाकिस्‍तान सेना की ओर जारी बयान में कहा गया कि हाल ही में पदोन्‍नत किए गए लेफ्टिनेंट जनरल बिलाल अकबर को चीफ ऑफ जनरल स्‍टाफ पर पर नियुक्ति दी गई है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल नजीर बट को डिफेंस यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंट से कॉर्प्‍स कमांडर पेशावर(11 कॉर्प्‍स) बनाया गया है। 11 कॉर्प्‍स से लेफ्टिनेंट जनरल हिदायत उर रहमान को हटाकर जनरल हैडक्‍वार्टर्स पर जनरल ट्रेनिंग एंड इवेल्‍युशन का आर्इजी बनाया गया है।

लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम बाजवा जो कि सेना की मीडिया विंग के मुखिया थे उन्‍हें इंस्‍पेक्‍टर जनरल आर्म्‍स नियुक्‍त किया गया है। इससे पहले नौ दिसंबर को सात मेजर जनरल को लेफ्टिनेंट जनरल बनाया गया था। गौरतलब है कि 29 नवंबर को जनरल जावेद बाजवा पाकिस्‍तानी सेना के 16वें चीफ बने थे। उन्‍होंने राहील शरीफ की जगह ली। जनरल शरीफ को 2014 में आर्मी चीफ बनाया गया था। पिछले 20 सालों में शरीफ पहले ऐसे पाकिस्तानी कमांडर थे जो समय पर अपने पद से हट गए। बाजवा प्रशिक्षण एवं मूल्यांकन महानिरीक्षक थे और उन्हें पदोन्नत कर फोर-स्टार जनरल बनाया गया तथा सेना प्रमुख नियुक्त किया गया। उन्होंने प्रसिद्ध 10 कोर का भी नेतृत्व किया है जो नियंत्रण रेखा के क्षेत्रों का जिम्मा संभालती है। मेजर जनरल के तौर पर बाजवा ने सेना की उत्तरी कमान का नेतृत्व किया। 10 कोर में लेफ्टिनेंट कर्नल के तौर पर भी सेवा दी।

वह कांगो में पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह के साथ संयुक्त राष्ट्र के मिशन में ब्रिगेड कमांडर भी रहे। सिंह ने वहां एक डिवीजन कमांडर के तौर पर सेवा दी थी। इससे पहले बाजवा क्वेटा के इंफेंट्री स्कूल में कमांडेंट भी थे। बाजवा को पीओके एवं उत्तरी क्षेत्रों में व्यापक भागदारी के कारण नियंत्रण रेखा से जुड़े मामलों का व्यापक अनुभव है। बाजवा चर्चाओं में रहना पसंद नहीं करते और अपने सैनिको के साथ काफी अच्छे से जुड़े हुए हैं।

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