ओडिशा के तट से अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण करने की तैयारी

भारत दो साल बाद एक बार फिर ओडिशा के तट से अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण करने की तैयारी में है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इस इंटरकॉन्टिनेंटल...

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भारत दो साल बाद एक बार फिर ओडिशा के तट से अग्नि-5 मिसाइल का परीक्षण करने की तैयारी में है। परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इस इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) की पहुंच उत्तरी चीन तक होगी।

रक्षा सूत्रों के हवाले से एक अंग्रेजी अखबार ने दावा किया है कि दिसंबर के आखिर या अगले साल की शुरुआत में इस मिसाइल का परीक्षण किया जाएगा। इससे पहले जनवरी 2015 में इसका टेस्ट किया गया था। तब इसमें मामूली तकनीकी खामियां सामने आई थीं, जिन्हें अब दूर कर लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, इंटरनल बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फिगरेशन में कुछ इश्यू थे। यह टेस्ट कामयाब होने के बाद स्ट्रेटजिक फोर्सेस कमांड (SFC) को ट्रायल की हरी झंडी मिल जाएगी।

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हालांकि, भारत अपनी ओर से रणनीतिक संयम भी दिखाना चाहता है क्योंकि उसकी नजर 48 देशों की सदस्यता वाले न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) का हिस्सा बनने पर है। आपको बता दें कि चीन लगातार एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध कर रहा है। लेकिन इसके बावजूद भारत 34 देशों के मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (MTCR) में एंट्री पाने में कामयाब रहा। यही नहीं, हाल ही में भारत ने जापान के साथ भी परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

अग्नि-5 की विशेषताएं

अग्नि पांच मिसाइल को यदि वास्तविक नियंत्रण रेखा के बेहद करीब से छोड़ा जाए, तो यह चीन के उत्तरी भाग तक प्रहार करने में सक्षम हो जाएगी।
अग्नि पांच को सेना में शामिल करने में अभी कुछ वर्ष का समय लगेगा। सशस्त्र बलों में पहले से ही अग्नि-प्रथम (700 किमी) और अग्नि-द्वितीय (2,000 किलोमीटर से अधिक) और 3000 किमी तक मार करने वाली अग्नि तृतीय मिसाइल पहले ही शामिल की जा चुकी हैं।
इससे पहले जनवरी 2015 में ओडिशा तट के पास व्हीलर द्वीप से भारत की इस सबसे ताकतवर सामरिक मिसाइल का परीक्षण किया गया था। यह मिसाइल पांच हजार किमी से अधिक दूरी तक मार करने में सक्षम है।
50 टन वाली यह देश की पहली अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसका कैनिस्टर संस्करण में पहली बार परीक्षण किया गया। तीन चरणों वाली इस मिसाइल की यह तीसरी टेस्ट फायरिंग थी।

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